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हमारी पाक रणनीति की विसंगतियां

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यों तो भारत-पाक विभाजन के बाद से ही पाकिस्तान ने कभी भी अपना दुश्मनी पूर्ण रवैय्या नहीं छोड़ा. गत सत्तर वर्षों में उसने सभी प्रपंच कर हमारे देश के समक्ष चुनौतियां प्रस्तुत की. यद्यपि भारत ने अनेक बार उसे भयानक रूप से हार का मुहं देखने को विवश किया.1965 की इंडो-पाक युद्ध में पाक सेना के दांत खट्टे किये और उसके बहुत बड़े इलाके पर भारत ने कब्ज़ा जमा लिया. यद्यपि अंतर्राष्ट्रीय दबाव के आगे भारत को अपना जीता इलाका पाक को लौटना पड़ा.परन्तु पाकिस्तान को उसकी औकात बताने के लिए यह युद्ध एक उदहारण था. तत्पश्चात 1971 में पाकिस्तान अपने क्रियाकलापों के कारण  दो देशों अर्थात पाक और बंगला देश(पूर्वी पाकिस्तान) में विभक्त हो गया. उस घटना के दौरान भी पाक सेना को भारत के सैन्य बलों से टकराना पड़ा और शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा, जब उसके नब्बे हजार से अधिक सैनिकों  को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर होना पड़ा. और यह समय भारत के इतिहास का गौरव बन गया. देश वासियों को लगा था पाकिस्तान से मिलने वाला तनाव समाप्त हो जायेगा,परन्तु जिस देश के डी एन ए में नफरत ही लिखी हो उसे समय समय पर सबक सिखाते रहना आवश्यक होता है.तत्पश्चात भी पाकिस्तान छद्म युद्ध कर(आतंक वाद के सहारे) हमारे को को अस्थिर करने का प्रयास  करता रहा है.देश को 1999 में एक बार फिर कारगिल युद्ध का सामना करना पड़ा और विदेशी सेनाओ को खदेड़ना पड़ा.  ऐसे कुटिल प्रवृति वाले  पडोसी देश से  शांति वार्ता करना या उससे उदार व्यव्हार करना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं माना  जा सकता. इसी कारण हमारे देश की पाक रणनीति में व्याप्त उदारता कदापि उचित नहीं लगती

कुछ उदाहरण प्रस्तुत हैं

1. भारत सरकार ने पाकिस्तान को “सर्वाधिक अनुग्रहीत राष्ट्र” अर्थात ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का दर्जा दे रखा है,आखिर क्यों? जो देश आतंक वाद का निर्यात कर समय समय पर हमें जख्म देता रहता है,अपने आतंकी हमलों द्वारा बेगुनाह देश वासियों  का खून बहाता रहता है,कश्मीर को आतंकवाद का पर्याय बनके रखा है वहां का जनजीवन अस्तव्यस्त कर दिया है वहां की अर्थव्यवस्था को प्रगति की रह में रोड़ा साबित हो रहा है.ऐसे पडोसी देश को ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ की श्रेणी में कैसे रखा जा सकता है

2. जो पडोसी देश दुश्मनी की सभी हदे पार कर चुका हो और निरंतर नापाक हरकतें करता रहता हो उससे    व्यापारिक या राजनैतिक सम्बन्ध कायम कैसे और क्यों रखे जा सकते है? ऐसा देश किसी प्रकार से राजनयिक सम्बन्ध रखने योग्य नहीं हो सकता. उससे सभी प्रकार के राजनैतिक संबंधों का विच्छेद कर लेना चाहिए.और व्यापारिक संबंधों को विराम लगा देना चाहिए.

3. भारत सरकार ने दोनों देशो के बीच सद्भावना रेल और बस यात्रा की अनुमति दे रखी है क्या यह उचित मानी जा सकती है? जिस देश से हर समय आतंकी खतरा बना रहता हो उस देश से आवागमन जारी रखना अपनी सुरक्षा को खतरे में डालने जैसा ही है. आतंकीयों  के प्रवेश की संभावनाएं भी प्रबल होती हैं.

4. 1960 में किये गए पाकिस्तान से सिन्धु नदी का जल के बटवारे  से सम्बंधित समझौता भी कायम रखना कितना उचित है? 1960 के पश्चात् अनेकों युद्ध इस देश के साथ लड़े गए,फिर भी हमारा देश समझौते का पालन करता रहा और पाकिस्तान की धरती की प्यास बुझाता रहा आखिर क्यों? कहते है युद्ध में सब कुछ जायज है, अतः हमें भी कड़ा कदम उठाते हुए सिन्धु नदी के पानी को रोक देना चाहिए था. पाकिस्तान बहुत शीघ्र ही अपनी हरकतों से बाज आ सकता था. हो सकता है हमारे देश के इस कदम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुछ विरोध का सामना करना पड़ता परन्तु अपने देश में सुख शांति बनाये रखने के लिए कुछ देशों की नाराजगी भी सहन की जा सकती है. मजेदार बात यह भी है की समझौते के अनुसार भी भारत ने अपने हक़ का सदुपयोग नहीं किया. यदि अपने हिस्से के जल का भी उचित उपयोग किया गया होता तो भी पाकिस्तान के लिए कष्टदायक साबित होता और पाकिस्तान की खेतीबारी प्रभावित होती.

5. कश्मीरी अलगाववादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी जो हुर्रिअत कांफ्रेंस का नेता है,और यासीन मालिक जो जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का चेयरमेन है [Chairman of Jammu Kashmir Liberation Front (J.K.L.F.)]. जैसे अनेक अलगाव वादी नेताओं की सुरक्षा पर भारत सरकार करोड़ों रूपए करती है.गत माह बी.जे.पी.सांसद अजात शत्रु ने सदन में दावा किया की भारत सरकार ने गत पांच वर्षों में 560 करोड़ रूपए अलगाव वादियों की सुरक्षा और आवागमन पर खर्च किये परन्तु क्यों?  देश के विरुद्ध प्रचार करने वाले, या शत्रु देश से हाथ मिलाने वाले नेताओं  की सुरक्षा पर भारत सरकार द्वारा करोड़ों रूपए खर्च् करना कितना तर्कसंगत है?

उपरोक्त सभी उदहारण सिद्ध करते है हमारे देश की सरकारे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की समस्या को लेकर कितनी गंभीर रही हैं? और पाकिस्तान भारत की उदारता का शत्रुता से उत्तर देता रहा है.अब समय आ गया है की पाकिस्तान को उसकी औकात बताई जाय.(SA-197B)

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
14/10/2016

आपका सम्पूर्ण आलेख ठोस तथ्यों एवं अकाट्य तर्कों के आधार पर सिरजा गया है आदरणीय सत्यशील जी । आपकी विवेचना ही नहीं, निष्कर्ष भी उपयुक्त है । अभिनंदन ।

    SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
    17/10/2016

    माथुर साहेब ,आपकी अनुशंसा के लिए आभारी हूँ .मेरे ब्लॉग पर प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद.

Shobha के द्वारा
12/10/2016

श्री सत्यशील जी बहुत अच्छा लेख हमारे यहाँ बोट बैंक की नीति रही है राजनितिक दल सोचते हैं पाकिस्तान से फतवा आयेगा उन्हें एक मुश्त वोट मिलेंगे कोई मस्लिम के हित की नहीं सोचता |पाकिस्तान की विदेश नीति भारत से अधिक सम्पन्न बनना और मुस्लिम जगत का नेता बनना

    SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
    17/10/2016

    शोभा जी,अनुशंसा के लिए धन्यवाद आपने बिलकुल सही फ़रमाया

rameshagarwal के द्वारा
07/10/2016

जय श्री राम आदरणीय सत्य शीलजी ये हमारे नेताओ की गलतिया है जिसके वजह से हम इस हालत में है १९४८ में नेहरूजी वाला बिना किसी से सलाह लिए युद्ध विराम की घोषणा के साथ संयुक्त ले जाना बहुत बड़ी गलती थी नहीं तो पूरा कश्मीर हमारे पास होता और समस्या ख़तम होजाती.१९६६ में कहा जाता की इंदिराजी ने शाश्त्रीजी के साथ साजिस कर मरवा दिया.१९७१ में ९०००० सैनिको को बिना कश्मीर लिए चोदना और फिर कारगिल युद्ध और संसद हमले के वक़्त वाजपई जी यदि जरा और हिम्मत दिखा जाते आज कोइ समस्या नहीं होती लेकिन पुरानी गलतियां अब नहीं दोहराई जायेंगी अन्य उपायों पर विचार हो रहा है!

    SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
    09/10/2016

    रमेश जी, आपकी बात में दम है उत्साहवर्द्धन के लिए धन्यवाद.साथ ही निवेदन है की टिप्पड़ी पोस्ट करने से पूर्व वर्तनी अवश्य जाँच लिया करे.कही अर्थ का अनर्थ न हो .


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